यह योग क्या है
साठ अंश, वृत्त का छठा भाग। ग्रह उन तत्वों में खड़े होते हैं जो टकराते नहीं: अग्नि के साथ वायु, या पृथ्वी के साथ जल। प्रमुख योगों में इसकी कक्षा सबसे संकरी है, सूर्य के लिए 6.5 अंश और शेष पिंडों के बीच 5 अंश।
जन्म कुंडली में
षष्ठक ऐसी क्षमता बताता है जिसे काम में लाना सरल है और जिसे अनदेखा करना उतना ही सरल। त्रिकोण की तरह यह पृष्ठभूमि में नहीं चलता: यह दी हुई चीज नहीं, एक सुविधाजनक अवसर है। कुंडली में षष्ठक अक्सर उससे पहचाना जाता है जो व्यक्ति बिना जोर लगाए कर लेता है, जब उसे याद आता है कि वह कर सकता है।
गोचर में
गोचर का षष्ठक एक खिड़की देता है। इन दिनों दोनों ग्रहों के विषय में कार्य सामान्य से कम खर्च मांगता है, परंतु वह स्वयं नहीं होगा। इसलिए षष्ठक को गोचर कैलेंडर से पहले ही निकालकर उसके नीचे बातचीत, दस्तावेज जमा करना और छोटे कामों का आरंभ रखना उपयोगी है।
पढ़ने की सामान्य भूलें
षष्ठक को अक्सर त्रिकोण समझ लिया जाता है और उससे अपने आप परिणाम की आशा की जाती है। वह नहीं आएगा: यह अवसर है, दी हुई चीज नहीं। दूसरी भूल है चौड़ी कक्षा: प्रमुख योगों में षष्ठक की कक्षा सबसे संकरी है, और आठ अंश के अंतर वाला संबंध षष्ठक नहीं रह जाता, चाहे उसे देखने की इच्छा कितनी भी हो।
प्रमुख दृष्टि-योग
पिंड के अनुसार कक्षा
- सूर्य 6.5°
- चंद्र 6°
- बुध 5°
- शुक्र 5°
- मंगल 5°
- गुरु 5°
- शनि 5°
- युरेनस 5°
- नेपच्यून 5°
- प्लूटो 5°
जोड़ी की कक्षा दोनों संख्याओं में छोटी होती है। सूर्य और प्लूटो की युति 5 अंश तक ही मानी जाती है, क्योंकि प्लूटो की कक्षा इतनी है, चाहे सूर्य की 12 हो।