वैदिक बनाम पश्चिमी ज्योतिष
मुख्य अंतर राशि है। पश्चिमी ज्योतिष उष्णायन विषुव बिंदु से जुड़े उष्णकटिबंधीय राशि चक्र का उपयोग करता है। वैदिक ज्योतिष तारों से जुड़े निरयन राशि चक्र का उपयोग करता है। अयनगति के कारण इन दोनों के बीच का अंतर अब लगभग 24 अंश है।
अभ्यास में इसका मतलब यह है कि ज्योतिषीय चार्ट में अधिकतर ग्रह पूर्व के राशि में होंगे। पश्चिमी प्रणाली में सूर्य केतु तुला राशि की शुरुआत में होने पर वैदिक प्रणाली में सूर्य कन्या राशि में होगा।
- •उष्णकटिबंधीय राशि चक्र विषुव बिंदु से, निरयन तारों से
- •अयनांश वर्तमान में लगभग 24° है तथा प्रति वर्ष लगभग 50 आर्कसेकंड बढ़ता है।
- •सबसे आम आयनांश लाहिरी है, इसके बाद रामन और कृष्णमूर्ति भी प्रयुक्त होते हैं।